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निवेश के रास्ते
विदेश में निवेश-नीति
विदेशों में भारतीय निवेश नीति के उदारीकरण की शुरूआत कल्याण बैनर्जी समिति की सिफारिशों पर वर्ष 1992 में सबसे पहले की गई। प्रक्रियाओं का और अधिक उदारीकरण और उन्हें सुप्रवाही बनाने का कार्य 1995 में किया गया जब संशोधित दिशानिर्देश अधिसूचित किए गए। तब से इस नीति को लगातार समय-समय पर उदार बनाया जाता रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक भारतीय रिजर्व बैंक को इस नीति को प्रशासित करने वाले केन्द्रक अभिकरण के रूप में नामित किया गया जो कार्य पहले वाणिज्य मंत्रालय को सौंपा गया था। विदेशों में भारतीय निवेशों की व्यवस्था शुरू करने के पीछे मूल तर्काधार भारतीय उद्योगों को नए बाजार तथा प्रौद्योगिकियों को मुहैया कराने की जरूरत रही है ताकि वैश्विक दृष्टि से उनकी स्पर्धात्मकता में वृद्वि हो और देश के निर्यात-प्रयासों में मदद मिले।
स्वत:चालित मार्ग
इस योजना के अंतर्गत भारतीय कम्पनियां भारतीय रिजर्व बैंक या भारत सरकार के पूर्वानुमोदन के बिना एक वर्ष में 100 मिलियन अमरीकी डालर (सार्क देशों (पाकिस्तान को छोड़कर) और म्यांमार में 150 मिलियन अमरीकी डालर तथा नेपाल और भूटान में रूपए निवेश के रूप में 700 करोड़ रू तक) के निवेश मुक्त रूप से कर सकता है, बशर्ते कि विदेश में किया गया यह निवेश स्थावर सम्पदा-उन्मुखी न हो। ऐसे निवेशों का वित्तपोषण भारतीय कम्पनी के विदेशी मुद्रा अर्जक विदेशी मुद्रा खाते (ईईएफसी) में रखे शेष से अथवा 100 प्रतिशत एडीआर/जीडीआर प्राप्तियों से या भारतीय कम्पनी के निवल मूल्य के 100 प्रतिशत तक भारत में किसी प्राधिकृत डीलर से विदेशी मुद्रा के आहरण से किया जा सकता है। ऐसे निवेश भारतीय रिजर्व बैंक को कार्योत्तर सूचित किए जाएंगे (देखें आरबीआई अधिसूचना सं फेमा 19/आर बी–2000 दिनांक 3 मई 2000, अधिसूचना सं फेमा 53/2002-आर बी दिनांक 1 मार्च, 2002, द्वारा यथासंशोधित, आरबीआई वेबसाइट पर )
देश में विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) यूनिटें, 100 मिलियन अमरीकी डालर की सीमा के अध्यधीन रहे बिना स्वत:चालित मार्ग के तहत, ऐसी यूनिटों के ईईएफसी शेष से वित्त पोषित किए जाने वाले विदेशों में निवेश करने के लिए पात्र हैं। तथापि, एसईजेड यूनिटों द्वारा ऐसा निवेश 500 मिलियन अमरीकी डालर की समग्र सीमा (सभी एसईजेड यूनिटों को मिलाकर) के अधीन होगा। (देखें आरबीआई अधिसूचना सं फेमा 49/2002-आर बी दिनांक 19 जनवरी, 2002, अधिसूचना सं फेमा 19/आर बी-2000 दिनांक 3 मई 2000 में आंशिक संशोधन-स्वरूप आरबीआई वेबसाइट पर)
एडीआर/जीडीआर स्वत:चालित मार्ग
इस योजना के अंतर्गत भारतीय कम्पनियां रिजर्व बैंक को कार्योत्तर सूचना देने की शर्त के अध्यधीन, स्वत:चालित मार्ग के अंतर्गत बिना किसी सीमा के विदेशों में निवेश के लिए एडीआर/जीडीआर प्राप्तियों की 100 प्रतिशत राशि को स्वतंत्र रूप से इस्तेमाल कर सकती हैं। (देखें आरबीआई अधिसूचना सं फेमा 40/2002-आर बी दिनांक 2 मार्च, 2001, अधिसूचना सं फेमा 19/2000-आर बी दिनांक 3 मई 2000 में आंशिक संशोधन-स्वरूप आरबीआई वेबसाइट पर )
एडीआर/जीडीआर स्वत:चालित स्टाक/स्वैप मार्ग
इस मार्ग के अंतर्गत भारतीय कम्पनियां, आरबीआई को कार्योत्तर सूचना देने के अध्यधीन, एक ही महत्वपूर्ण गतिविधि में विदेश में अधिग्रहणों के लिए एडीआर/जीडीआर के नए निर्गम की स्वत: ही 100 मिलियन अमरीकी डालर तक अथवा गत वर्ष में अपने निर्यात अर्जनों के 10 गुणा तक अदला-बदली कर सकती हैं। विदेशी कम्पनी के शेयरों के अधिग्रहण के बदल में एडीआर और जीडीआर और/अथवा जीडीआर के निर्गम की तिथि के 30 दिन के भीतर, भारतीय पक्षकार रिजर्व बैंक को फार्म ओडीजी में रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा (देखें आरबीआई अधिसूचना सं फेमा 19/2000-आर बी दिनांक 3 मई 2000 में आंशिक संशोधन-स्वरूप, आरबीआई वेबसाइट पर)
भागीदारी फर्मों द्वारा निवेश
भारतीय भागीदारी अधिनियम 1932 में तहत पंजीकृत भागीदारी फर्म जो विशिष्ट पेशेवर सेवाएं मुहैया कराने में लगी है, आरबीआई के पूर्वानुमोदन के बिना (केवल कार्योत्तर सूचना), समान कार्यकलाप में लगी किसी विदेशी कम्पनी में एक वित्तीय वर्ष में 1 मिलियन अमरीकी डालर या समतुलन राशि का निवेश कर सकती है जो भारत से प्राप्त प्रेषणाओं और/अथवा ऐसी विदेशी कम्पनियों से मिलने वाले शुल्कों के मुद्रीकरण/अन्य पात्र राशियों के रूप में हो सकता है, बशर्तें निवेश करने वाली फर्म संबंधित अखिल भारतीय पेशेवर संगठन/निकाय की सदस्य हो (देखें आरबीआई अधिसूचना सं फेमा 40/2001-आर बी दिनांक 2 मार्च, 2001, अधिसूचना सं 19/2000-आर बी दिनांक 3 मई 2000 में आंशिक संशोधन स्वरूप, आरबीआई वेबसाइट पर
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सामान्य मार्ग
उपर्युक्त स्वत:चालित मार्ग के तहत शामिल न होने वाले प्रस्तावों पर विदेशों में निवेश से संबंधित विशेष समिति द्वारा विचार किया जाता है जिसकी अध्यक्षता आरबीआई के डिप्टी गवर्नर द्वारा की जाती है और जिसमें वित्त, वाणिज्य, विदेश मंत्रालय तथा रिजर्व बैंक के सदस्य प्रतिनिधि होते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक इस समिति का सचिवालय है। भारत से बाहर संयुक्त उद्यम/पूर्ण स्वामित्वाधीन अनुषंगी कम्पनी में प्रत्यक्ष निवेश अथवा विदेशी कम्पनी के शेयरों की अदला-बदली के रूप में निवेश के लिए आवेदन क्रमश: फार्म ओडीआई या फार्म ओडीबी में रिजर्व बैंक, मुद्रा नियंत्रण विभाग, सेन्ट्रल ऑफिस, मुम्बई-400001 को किया जाएगा।
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