| एडीआर/जीडीआर निर्गमों के जरिए जुटाई गई निधियों के निवेश
भारतीय पक्षकार को अधिसूचना के विनियम सं 6(6) की शर्तों के अनुसार, एडीआर/जीडीआर के जरिए जुटाई गई निधियों से बिना किसी मौद्रिक सीमा के प्रत्यक्ष निवेश करने की अनुमति दी गई है।
शेयरों की अदला-बदली या विनिमय की व्यवस्था के अंतर्गत किया गया निवेश
अधिसूचना के विनियम 8 की शर्तों के अनुसार, किसी भी कार्यकलाप में लगा भारतीय पक्षकार जिसमें एडीआर/जीडीआर निर्गम पहले ही जारी कर दिया हो, उसी महत्वपूर्ण कार्येकलाप में लगी विदेशी कम्पनियों के शेयर उसे निर्गमित एडीआर/जीडीआर के बदले में अधिग्रहीत कर सकती है जो विदेशी मुद्रा परिवर्तनीय बांड और सामान्य शेयरों (निक्षेपागार प्राप्ति तंत्र) के निर्गम की योजना 1993 और केन्द्र सरकार द्वारा उसके तहत समय-समय पर जारी दिशानिर्देशों के अनुसार हो। बशर्तें कि निम्नलिखित शर्तों का पालन किया जाए:
- एडीआर/जीडीआर भारत से बाहर किसी भी स्टाक एक्सचेंज में सूचीबद्व हों।
- भारतीय पक्षकार द्वारा ऐसा निवेश निम्नलिखित राशियों में उच्चतम सीमा से अधिक न हो, अर्थात्
- 100 मिलियन अमरीकी डालर की समतुल्य राशि, अथवा
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पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान भारतीय पक्षकार के निर्यात अर्जनों, जो इसे लेखापरीक्षित विवरणों में दिखाया गया हो, के दस गुणा की समतुल्य राशि। सीमा का निर्धारण करने के प्रयोजन से, उसी वित्तीय वर्ष में विनियम 6 के तहत पहले किए जा चुके निवेश भी शामिल किए जाने होंगे।
- अधिग्रहण के प्रयोजन से एडीआर और/अथवा जीडीआर निर्गम का समर्थन भारतीय पक्षकार द्वारा निर्गमित नए इक्विटी शेयरों से किया जाना होगा;
- नए एडीआर और/अथवा जीडीआर निर्गम के बाद, विस्तारित पूंजी आधार में भारत से बाहर बसे व्यक्तियों द्वारा भारतीय निकाय में कुल धारिता ऐसे निवेश के लिए प्रासंगिक विनियमों के तहत निर्धारित क्षेत्रक सीमा से अधिक न हो;
- विदेशी कम्पनी के शेयरों का मूल्यांकन निम्नानुसार होगा:
- यदि शेयर किसी स्टाक एक्सचेंज में सूचीबद्व न हो तो निवेश बैंकर की सिफारिशों के अनुसार; अथवा
- अधिग्रहण किए जाने के माह से पहले के तीन माह के दौरान विदेश में किसी भी स्टाक एक्सचेंज में मासिक औसत मूल्य के आधार पर आकलित विदेशी कम्पनी के वर्तमान बाजार मुद्रीकरण और इसके अतिरिक्त, प्रीमियम के आधार पर यदि कोई हो, जो अन्य मामलों में सम्यक तत्परता रिपोर्ट में निवेश बैंकर द्वारा अनुशंसित किया गया हो।
भारतीय पक्षकार को ऐसे लेन-देन की तारीख से 30 दिन की अवधि में रिजर्व बैंक को फार्म ओ डी जी में ऐसे अधिग्रहण की सूचना देना अपेक्षित हो।
भारत की फर्म द्वारा विदेश में निवेश
अधिसूचना के विनियम 17ख की शर्तों के अनुसार, भारतीय भागीदारिता अधिनियम, 1932 के अंतर्गत पंजीकृत भागीदारी फर्में जो चार्टर्ड एकांउटेंसी, वकालत और संबंधित सेवाओं, सूचना प्रौद्योगिकी और मनोरंजन सॉफ्टवेयर संबंधी सेवाओं एवं चिकित्सा तथा स्वास्थ्य देख-रेख से जुड़ी सेवाओं में लगी हों, को विदेश में इसी प्रकार की गतिविधियों में लगी विदेशी कम्पनियों में बिना पूर्वानुमोदन के निवेश करने की अनुमति दी जाएगी बशर्ते
- ऐसा निवेश एक वित्तीय वर्ष में 1 (एक) मिलियन अमरीकी डालर या इसकी समतुल्य राशि से अधिक न हो
- निवेशकारी फर्म संबंधित अखिल भारतीय पेशेवर संगठन/निकाय की सदस्य हो; और
- एक रिपोर्ट जिसमें ये सूचनाएं हों (i) निवेशकारी फर्म का नाम, पूरा पता, पंजीकरण और सदस्यता का विवरण, (ii) विदेश में निवेश के पूर्ण ब्यौरे, (iii) निवेशकारी फर्म को मिलने वाली प्रेषणाओं/शुल्क के मुद्रीकरण की राशि/अन्य प्राप्त राशियों की तारीख तथा राशि, (iv) विदेशी निकाय की गतिविधि सहित उसका नाम तथा पता, (v) पहचान संख्या, यदि रिजर्व बैंक द्वारा पहले आवंटित कर दिया गया हो, रिजर्व बैंक को ऐसे निवेश करने के 30 दिन के भीतर प्राधिकृत डीलर के जरिए प्रस्तुत किया जाए इस शर्त के अध्यधीन कि फर्म विदेश में निवेश करने के लिए पात्र हो और इस शर्त के भी अध्यधीन रहते हुए कि ऐसे निवेश के लिए सम्पूर्ण वित्तपोषण फर्म द्वारा किया गया हो, तो विदेश में संयुक्त उद्यम/पूर्ण स्वामित्वाधीन अनुषंगी कम्पनियों में फर्म की ओर से और उसके लिए शेयर धारण करना अलग-अलग भागीदारों के लिए उपयुक्त होगा यदि मेजबान देश के विनियम अथवा प्रचालनात्मक अपेक्षाएं ऐसी धारिताओं को न्यायसंगत ठहराती है।
Subject to the firm being eligible for overseas investment and subject also to the condition that the entire funding for such investment is done by the firm, it will be in order for individual partners to hold shares for and on behalf of the firm in overseas JV/ WOS if the host country regulations or operational requirements warrant such holdings.
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