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कानून / विधान
 

Bulletकानूनी (विधिक) पहलू

व्‍यवसाय स्‍थापित करने के कानूनी पहलुओं पर ध्‍यान देने के कुछ सरल चरण है- अपनी इकाई को संगत प्राधिकरण में पंजीकृत करें, आपके लिए प्रयोज्‍य श्रम कानूनों का पता लगाएं, अपने वाणिज्यिक कर अदा करें तथा पर्यावरणीय पहलुओं को ध्‍यान में रखे। इन में से प्रत्‍येक पहलु पर नीचे विस्‍तृत चर्चा की गई है:-

व्‍यवसाय यूनिट (इकाई) को पंजीकृत करना 
लघु तथा अनुषंगी इकाइयों (अर्थात क्रमश: 6.0 मिलियन रुपए तथा 7.5 मिलियन रुपए से कम के संयंत्र तथा मशीनरी में निवेश करने वाले उपक्रम) संबंधित राज्‍य सरकार के उद्योग निदेशक के पास पंजीकरण करवाएंगे। 

पंजीकरण का मुख्‍य उद्देश्‍य आंकड़ों का अनुरक्षण करना तथा प्रोत्‍साहन एवं सहायता सेवाएं उपलब्‍ध करने के प्रयोजनार्थ ऐसी इकाइयों की नामावली का अनुरक्षण करना है। 

राज्‍यों ने सामान्‍यत: दिशानिर्देशों के अनुसार एक समान पंजीकरण प्रक्रियाविधियों को ग्रहण कर लिया है। तथापि, राज्‍यों द्वरा कुछ आशोधन किए गए होंगे। यह उल्‍लेखनीय है कि लघु उद्योग आधारत: एक राज्‍य विषय हैं। राज्‍य अपनी स्‍वयं की नीतियों के क्रियान्‍वयन के लिए उसी पंजीकरण योजना का प्रयोग करने है। यह संभव है कि कुछ राज्‍यों में ‘’एस आई डी ओ पंजीकरण योजना’’ तथा राज्‍य पंजीकरण योजना हो। 

पंजीकरण के लाभ
पंजीकरण योजना का कोई सांविधिक आधार नहीं है। इकाइयां केन्‍द्र या राज्‍य सरकार द्वारा दिए जाने वाले कुछ लाभ, प्रोत्‍साहन या सहायता प्राप्‍त करने के लिए सामान्‍यत: पंजीकरण करवा लेगी। केन्‍द्र द्वारा पेशकश किए जाने वाले प्रोत्‍साहनों में सामान्‍यत: निम्‍नलिखित निहित हैं:-

  • क्रेडिट निर्धारण (पूर्विका क्षेत्रक उधार देना), ब्‍याज की परिवर्ती दरें इत्‍यादि 
  • उत्‍पाद शुल्‍क छूट योजना 
  • प्रत्‍यक्ष कर कानूनों के अंतर्गत छूट 
  • सांविधिक सहायता यथा आरक्षण तथा विलम्बित भुगतानों पर ब्‍याज अधिनियम 

राज्‍यों/संघ राज्‍य क्षेत्रों के विशेषत: लघु क्षेत्र के लिए अपने स्‍वयं के सुविधा एवं प्रोत्‍साहन पैकेज है। वे औद्योगिक सम्‍पदाओं के विकास, कर संबंधी आर्थिक सहायता, विद्युत प्रशुल्‍क संबंधी आर्थिक सहायता, पूंजी निवेश संबंधी आर्थिक सहायता तथा अन्‍य प्रकार की सहायता से संबंधित हैं। केन्‍द्र तथा राज्‍य दोनों ही, चाहे कानून के अंतर्गत हो अथवा अन्‍यथा हो, अपने पास पंजीकृत इकाइयों के लिए सामान्‍यत: अपने प्रोत्‍साहन एवं सहायता पैकेज लक्षित करती हैं।
 
पंजीकरण योजना के उद्देश्‍य

  • उन लघु उद्योगों की गणना करना तथा उनकी नामावली का अनुरक्षण करना जिनके लिए प्रोत्‍साहनों तथा सहायता का पैकेज लक्षित है। 
  • मुख्‍यत: संरक्षण के संदर्भ में सांविधिक लाभों का उपभोग करने के लिए इकाइयों को समर्थ बनाने के लिए एक प्रमाणपत्र प्रदान करना। 
  • साख्यिकी संग्रहण के प्रयोजन को पूरा करना 
  • केन्‍द्र, राज्‍य तथा जिला स्‍तरों पर नोडल केन्‍द्रों का सृजन करन। 
योजना की विशिष्‍टताएं
योजना की विशेषताएं निम्‍न प्रकार हैं:
  • उद्योग निदेशक प्राथमिक पंजीकरण केन्‍द्र हैं। 
  • पंजीकरण स्‍वैच्छिक है तथा अनिवार्य नहीं है। 
  • सभी राज्‍यों में दो प्रकार का पंजीकरण किया जाता है। प्रथमत: एक अनंतिम पंजीकरण प्रमाणपत्र दिया जाता है। तथा उत्‍पादन आरम्‍भ होने के पश्‍चात एक स्‍थायी पंजीकरण प्रमाणपत्र दिया जाता है।

अनंतिम पंजीकरण प्रमाणप सामान्यत: 5 वर्षों के लिए वैध होता है तथा स्‍थायी पंजीकरण निरंतर होता है।

Bulletश्रम कानून 

वैज्ञानिक, तकनीकी एवं प्रबंधकीय क्षेत्रों में प्रशिक्षित जन शक्ति की प्रचुर उपलब्‍धता उन सशक्‍त कारणों में से एक है जिसने भारत के विकारस में सहायता की है तथा जो लाभ प्रद निवेश के लिए अवसरों की तलाश करी रहे विदेशी निवेशकों के लिए एक मुख्‍य आकर्षण है।

श्रम मंत्रालय में औद्योगिक संबंध प्रभाग (नीति कानूनी) भारत में सभी संगठनों पर प्रयोज्‍य निम्‍नलिखित श्रम विधानों/योजनाओं संबंधी कार्य करता है। उन्‍हें औद्योगिक संबंधों के कानूनी पहलू को शामिल करने वाले निम्‍नलिखित प्रभागों के अनुसार श्रेणीकृत किया जा सकता है।

औद्योगिक‍ विवाद अधिनियम, 1947 अप्रैल 1947 में अस्तित्‍व में आया। औद्योगिक विवादों की जांच पड़ताल तथा निपटान के लिए प्रावधान बनाने तथा कामगारों के लिए कतिपय सुरक्षोपायों की व्‍यवस्‍था करने के लिए इसे अधिनियमित किया गया था। अधिनियम में 40 धाराएं हैं जिन्‍हें 7 अध्‍यायों में विभाजित किया गया है। अध्‍याय I शीर्षक, परिभाषाओं इत्‍यादि से संबंधित है। अध्‍याय II में अधिनियम के अंतर्ग विभिन्‍न प्राधिकरण सन्निहित हैं। इन प्राधिकरणों में समाधान अधिकारी, श्रम न्‍यायालय तथा न्‍यायाधिकाय, शामिल हैं। अध्‍याय III में अधिनियम की मुख्‍य योजना सन्निहित है यथा श्रम न्‍यायालयों तथा औद्योगिक न्‍यायाधिकरणों को विवादों का संदर्भ। अध्‍याय IV में अधिनियम के अंतर्गत संघटित प्राधिकरणों किए गए हैं अध्‍याय V में हड़तालों तथा तालाबंदी को निषिद्ध करने, हड़तालों एवं तालाबंदी को गैर कानूनी घोषित करने तथा काम रोकने एवं छंटनी एवं बंद करने के लिए संबंधित प्रावधान सन्निहित हैं। अध्‍याय VI में अधिनियम के अंतर्गत विभिन्‍न शास्तियों के प्रावधान हैं। अध्‍याय VII में विविध प्रावधान सन्निहित हैं।

लघु क्षेत्र में विनिर्माण के लिए प्रारक्षित मदों का विनिर्माण करने वाली इकाइयों के लिए पूर्व लाइसेंस की आवश्‍यकता नहीं हैं। यह एक प्रमुख छूट है जहाँ लघु क्षेत्रों में उत्‍पादन के लिए कोई लाइसेंस प्रणाली या प्रतिबंध विद्यमान नहीं है। अवस्‍थल संबंधी प्रतिबंधों को भी न्‍यूनतम कर दिया गया है। इसी प्रकार, छोटे प्रतिष्‍ठानों की सहायता करने के लिए 1988 में श्रम अधिनियम को सरल किया गया है। अधिनियम, नामत: ‘’श्रम कानून (कुछ प्रतिष्‍ठानों द्वारा विवरणियों प्रस्‍तुत करने तथा रजिस्‍टरों का अनुरक्षण करने से छूट) अधिनियम, 1988’’ में श्रम संबधित कृत्‍य शामिल हैं तथा इस प्रकार इसमें निम्‍न व्‍यवस्‍था की गई हैं :

  • 10-19 व्‍यक्तियों को नियोजित करने वाले प्रतिष्‍ठाान से केवल 3 रजिस्‍टरों का अनुरक्षण करना तथा केवल एक वार्षिक केन्‍द्रीय विवरणी प्रस्‍तुत किया जाना अपेक्षित है। 
  • 10 व्‍यक्तियों से कम व्‍यक्तियों को नियोजित करने वाले प्रतिष्‍ठान से केवल एक रजिस्‍टर का अनुरक्षण किया जाना तथा केवल एवं वार्षिक केन्‍द्रीय विवरणी प्रस्‍तुत किया जाना अपेक्षित है।
  • कारखाना अधिनियम एवं बायलर अधिनियम के मामले को छोड़कर, विभिन्‍न श्रम कानूनों के लिए केवल एक निरीक्षण उत्‍तरदायी होगा।
 
(पृष्‍ठ 2 का पहला )
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