भारत की न्याय प्रणाली विश्व की सबसे पुरानी प्रणालियों में से एक हैं। प्रस्तावना भारत को 'सम्प्रभुता सम्पन्न प्रजातांत्रिक गणराज्य' के रूप में पारिभाषित करता हैं, इसमें केन्द्र और राज्यों में सरकार के संसदीय रूप सहित संघीय प्रणाली है, इसकी स्वतंत्र न्यायपालिका, मौलिक अधिकारी की गारंटी और राज्य नीतियों के नीति निर्देशक तत्व है, जिसका उद्देश्य यद्यपि कानून लागू नहीं जा सकता है, पर राष्ट्र के शासन के लिए आधारभूत तत्व है।
भारत में कानून का स्रोत संविधान है, जो इसके बदले में स्थिति को विधिक मान्यता देता है, मामले संबंधी कानून और पारम्परिक कानून इसके विधानों के अनुकूल हैं। भारतीय संविधान की एक प्रमुख विशेषता यह है कि संघीय प्रणाली को अपनाने और केन्द्रीय अधिनियमों एवं राज्य अधिनियमों के उनके संबंधित क्षेत्र में मौजूदगी के होते हुए भी इसने सामान्यत: संघीय और राज्य दोनों के कानूनों को प्रवर्तित करने के लिए एकीकृत एकल न्यायालयों की व्यवस्था की है। समस्त न्याय प्रणाली के शीर्ष पर भारत का उच्चतम न्यायालय विद्यमान है इसके नीचे प्रत्येक राज्य में या राज्यों के समूह में उच्च न्यायालय हैं। उच्च न्यायालय के नीचे अधीनस्य न्यायालयों पदानुक्रम में हैं। विभिन्न नामों के अधीन कुछ राज्यों में पंचायती न्यायालय भी कार्य करते हैं जैसे न्याय पंचायत, पंचायत अदालत, ग्राम कचहरी आदि ताकि छोटे और स्थानीय प्रकृति के सिविल और आपराधिक विवादों पर निर्णय लिए जा सकें।
यह खण्ड आपको भारतीय न्यायपालिका के बारे में उपयोगी सूचनाएं प्रदान करता है और न्यायालयीन निर्णयों के व्यापक डाटाबेस के माध्यम से, प्रतिदिन के आदेश, मामले की स्थिति, वाद सूची जानने की सुविधा मुहैया कराता है।
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