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''सेवाओं'' में आर्थिक कार्यकलापों का विषम विस्‍ता शामिल है। विगत समय में 'सेवा' की परिभाषा में भी परिवहर्तन आया है। सेवा क्षेत्र का अब अर्थव्‍यवस्‍था में केन्‍द्रीय स्‍थान है, यहा तक कि समकालीन विश्‍व में सेवा क्षेत्र का विकास अर्थव्‍यवस्‍था की प्रगति का समानार्थक बन गया है। भारत में वास्‍तविक स. ध. उ. मं सेवा खेत्र का अंश अन्‍य औद्योगीकृत राष्‍ट्रों की तुलना में सापेक्ष रूप से तीव्रतर गति में कृषि एवं उद्योग को पार कर गया है।

सेवा कर का प्रशासन केन्‍द्रीय उत्‍पाद शुल्‍क तथा सीमा शुल्‍क बोर्ड (सीबीईसी), राजस्‍व विभाग, वित्त मंत्रालय, भारत सरकार कें अंतर्गत कार्यरत केन्‍द्रीय उत्‍पादशुल्‍क आयुक्‍तालय द्वारा किया जाता है। यह नीति निर्माण, सीमाशुल्‍क एवं केन्‍द्रीय उत्‍पाद शुल्‍कों के संग्रहण के कार्यों, तस्‍करी निवारण तथा सीमाशुल्‍क से जुड़े मामलों के प्रशासन से संबंधित कार्य करता है। सेवा कर की अद्वितीय विशिष्‍टता मुख्‍यतया स्‍वैच्छिक अनुपालन के जरिए कर संग्रहण पर निर्भरता है।

संविधान के अनुच्‍छेद 265 में यह निर्धारित है कि कानून के प्राधिकार के सिवाए किसी भी कर का उद्ग्रहण या संग्रहण नहीं किया जाएगा। अनुसूची में इस VII विषय को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है:-

  • केन्‍द्रीय सूची (केवल केन्‍द्र सरकार के पास विधान बनाने की शक्ति है)
  • राज्‍य सूची (केवल राज्‍य सरकार के पास विधान बनाने की शक्ति है)
  • समवर्ती सूची (केन्‍द्र तथा राज्‍य सरकार दोनों ही विधान बनाने की शक्ति है)

उच्‍च्‍तर दर पर सेवा क्षेत्र की अभिवृद्धि अब तक शामिल न की गई सेवाओं को कर के दायरे में लाने के लिए अवसरों के साथ साथ चुनोतियां प्रस्‍तुत करती है। यह सरकार को भारती राजस्‍व की संभाव्‍यता की पेशकश करता है। यह आशा है कि यथेष्‍ट समय में सेवा कर से अंतरराष्‍ट्रीय व्‍यापार (सीमाशुल्‍क) तथा घरेलू विनिर्माण क्षेत्र (उत्‍पाद शसुल्‍क) पर कर भार कम हो जाएगा। अत: सेवाकर की आयोजित वृद्धि आर्थिक उदारीकरण तथा वैश्‍वीकरण के लक्ष्‍यों के समनुरूप होगी। इस प्रक्रिया से संग्रहण की दर या लागत में किसी महत्‍वपूर्ण वृद्धि के बिना नई सेवाओं पर करों का उद्ग्रहण अपेक्षित है।

सेवा का अधिनियम

1994 के वित्त अधिनियम के अध्‍याय में सेवा कर संबंधी निर्देशक सिद्धांत दिए गए हैं।

सेवा कर अधिनियम के बारे में और जानकारी के लिए यहां क्लिक करें।

सेवा कर नियमावली

सेवा कर नियमावली के बारे में और जानकारी के लिए यहां क्लिक करें।

सेवा कर का उद् ग्रहण भारत संघ द्वारा किया जाता है तथा यह सेवाओं के सकल मूल्‍य पर प्रभारित किया जाता है। सामान्‍यत:यह प्राप्ति आधार पर संदेय है। चूंकि यही एक अप्रत्‍यक्ष कर हैं, यह सेवा प्रदायक द्वारा संदेय है किन्‍तु साधारणतया इस की वसूली सेवाओं के प्राप्‍त कर्ता से ही जाती है।

सेवा कर के प्रतिसंतुलन के लिए एक प्रविधि अर्थात निविष्टि सेवाकर के लिए क्रेडिट की व्‍यवस्‍था की गई जिसके द्वारा कानून में सर्वत्र निविष्टि कर क्रेडिट की व्‍यवस्‍था की गई है, बिना इस तथ्‍य को ध्‍यान में रखे कि उत्‍पादन सेवा तथा निविष्टि सेवा एक ही सेवा श्रेणी के अंतर्गत आते है या नहीं। सेवा कर अदा करने के लिए दायी प्रत्‍येक व्‍यक्ति से यह अपेक्षित है कि वह सेवाकर प्राधिकारों में पंजीकरण कराए तथा कर भुगतान, विवरणियां दायर करने इत्‍यादि जैसे प्रक्रियात्‍मक अपेक्षाओं का अनुपालन करे। तथापि, अनिवासियों के मामले में, जिनके भारत में कोई कार्यालय नहीं है तथा जो भारत में सेवा कर अदा करने के लिए दायी हैं, यह भार 16 अगस्‍त 2002 से सेवा के प्राप्‍तकर्ता पर अंतरित कर दिया गया है।

उच्‍च्‍तर दर पर सेवा क्षेत्र की अभिवृद्धि अबतक शामिल न की गई सेवाओं को कर के जाल में लाने के लिए अवसरों के साथ साथ चुनैतियां प्रस्‍तुत करती है। यह सरकार को भारती राजस्‍व की संभाव्‍यता की पेशकश करता है। यह आशा है कि यथेष्‍ट समय में सेवा कर से अंतरराष्‍ट्रीय व्‍यापार (सीमाशुल्‍क) तथा घरेलू विनिर्माण क्षेत्र (उत्‍पाद शसुल्‍क) पर कर भार कम हो जाएगा। अत: सेवाकर की आयोजित वृद्धि आर्थिक उदारीकरण तथा वैश्‍वीकरण के लक्ष्‍यों के समनुरूप होगी। इस प्रक्रिया से संग्रहण की दर या लागत में किसी महत्‍वपूर्ण वृद्धि के बिना नई सेवाओं पर करों का उद् ग्रहण अपेक्षित है।

सेवाएं

सीवीईसी की शासकीय वेबसाइट विभिन्‍न सुविधाओं के पेशकश करती है तथा प्रयोक्‍ता को अपने उत्‍पादों तथा सेवाओं के वर्गीकरण एवं शुल्‍क दरों के बारे में कुछ जानकारी प्राप्‍त करने में समर्थ बनाती है। वे अपनी केन्‍द्रीय उत्‍पादशुल्‍क तथा सेवाकर विवरणियों भी इलेक्‍ट्रॉनिक रूप से दाया कर सकते हैं।

ई-फाइल

अपना सेवा कर ऑनलाइन जमा कराने के लिए आपके पास एक 15 अंकीय सेवा कर दाता (एमटीपी) कोङ, एक वैद्य ई-मेल पता होना चाहिए तथा आप अपने क्षेत्र के अधिकार के अंतर्गत आयुक्‍तालय की सहायता से एक प्रयोक्‍ता नाम सृजन करेगे (अपको ई-मेल प्रयोक्‍ता नाम की सूचना दी जाएगी तथा पासवर्ड का सृजन किया जाएगा)। ऐसा हो जाने पर आप अपनी सेवा कर विव‍रणियां इलेक्‍ट्रानिक रूप से दायर कर सकते हैं।

केन्‍द्रीय उत्‍पाद शुल्‍क तथा सेवा कर विभाग के बारे में जानकारी के लिए यहा क्लिक करें।

भारत में सेवाकर के बारे में जानें

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नागरिक > स्वास्थ्य | शिक्षा | रोजगार | आवास | कानून एवं व्यवस्था | यात्रा और पर्यटन | बैंकिंग और बीमा | कर
 
 
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