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धनकर एक महत्वपूर्ण प्रत्यक्ष कर विधान है जो पहली अप्रैल 1957 को अस्तित्व में आया। धन कर का उद्ग्रहण सम्पत्ति के स्वामित्व के प्राप्त लाभों पर किया जाता है। इस कर का भुगतान वर्षानुवर्ष उसी सम्पत्ति पर उसके बाजार मूल्य पर किया जाना है चाहे ऐसी सम्पत्ति से कोई आय प्राप्त हो या न हो।
निर्धारिती अथवा ऐसे व्यक्ति, जो धन कर अधिनियम के अंतर्गत धनकर का भुगतान करने के लिए दायी है, में कानूनी दूत कर्त्ता या मृतक व्यक्ति का प्रशासन तथा अनिवासी का एजेंट माना गया व्यक्ति शामिल है। अधिनियम के अंतर्गत, निम्नलिखित व्यक्तियों द्वारा निर्धारण वर्ष के दौरान उनके द्वारा धारित धन के संबंध में कर प्रभारित किया जाता है:-:-
- कम्पनी
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हिन्दु अविभाजित परिवार (एचयूएफ) जो अधिनियम के अंतर्गत मान्यताप्राप्त किस्म का निर्धारिती है जिनमें एक ही पूर्वज के सभी वंशज तथा संयुक्त परिवार की संचित निधि से आय प्राप्त करने वाले व्यक्ति शामिल है। हिन्दु, जैन, बौद्ध तथा सिक्ख परिवार इस प्रकार मान्य किए गए हैं।
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व्यक्तियों का संघ या व्यक्तियों का निकाय
- गैर कॉर्पोरेटिव करदाता जिनके लेखों की सांविधिक लेखापरीक्षा की जानी है।
- जो 1 बाई 6 श्रैणी में आते है
कर के प्रति प्रभार्यता निर्धारिती की रिहायशी प्रास्थिति तथा व्यक्ति की नागरिकता पर भी निर्भर करती है।
यहां यही उल्लेखनीय है कि उत्पादक परिसम्पत्तियां जैसे शेयर, ऋणपत्र, बैंक की जमाराशियों तथा म्यूचुअल फंडों में निवेश धन कर से छूट प्राप्त हैं। अनुत्पादक परिसम्पत्तियों में स्वर्णाभूषण, सर्राफा, मोटरकार, वायुयान, शहरी भूमि इत्यादि शामिल है। विदेशी राष्ट्रियों को गैर भारतीय परिसम्पत्तियों पर धन में छूट प्राप्त है। धन कर के ब्यौरों का पता सविधान द्वारा यथा निर्मित अधिनियमो तथा नियमों से लगाया जा सकता है। और अधिक जानने के लिए नीचे दी गई कड़ी पर क्लिक करें।
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