भारत की राष्ट्रपति
श्रीमती प्रतिभा देवीसिंह पाटिल
श्रीमती प्रतिभा देवीसिंह पाटिल भारत की बारहवीं राष्ट्रपति बनीं और उन्होंने 25 जुलाई 2007 को कार्य भार संभाला।
श्रीमती प्रतिभा देवीसिंह पाटिल का जन्म 19 दिसंबर 1934 को ज़िला जलगांव, महाराष्ट्र में हुआ था।
शिक्षा और शैक्षणिक योग्यताएं
श्रीमती प्रतिभा देवीसिंह पाटिल ने एम. जे. कॉलेज, जलगांव (महाराष्ट्र) से एम. ए. डिग्री प्राप्त की तथा शासकीय विधि महाविद्यालय, बॉम्बे (अब मुम्बई) से एल. एल. बी. की डिग्री पाई। उन्होंने एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में कार्य किया और जलगांव में एक अधिवक्ता के रूप में कार्य किया।
श्रीमती प्रतिभा देवीसिंह पाटिल ने इन पदों पर कार्य किया:
- सदस्य, महाराष्ट्र विधान सभा (1962-85)
- उप मंत्री, सार्वजनिक स्वास्थ्य, निषेध, पर्यटन, आवास और संसदीय कार्य, महाराष्ट्र सरकार (1967-72)
- केबिनेट मंत्री, समाज कल्याण, महाराष्ट्र सरकार (1972-74)
- केबिनेट मंत्री, सार्वजनिक स्वास्थ्य और समाज कल्याण, महाराष्ट्र (1974-75)
- केबिनेट मंत्री, निषेध, पुनर्वास और सांस्कृतिक कार्य, महाराष्ट्र सरकार (1975-76)
- केबिनेट मंत्री, शिक्षा, महाराष्ट्र सरकार (1977-78)
- विपक्षी नेता, महाराष्ट्र विधान सभा (जुलाई 1979-फरवरी 1980)
- केबिनेट मंत्री, शहरी विकास और आवास, महाराष्ट्र सरकार (1982-85) और
- केबिनेट मंत्री, नागरिक आपूर्ति और समाज कल्याण, महाराष्ट्र सरकार (1983-85)।
वे जून 1985 से 1990 के बीच राज्य सभा (संसद के उच्च सदन) तथा सभापति, राज्य सभा 18 नवम्बर 1986 से 5 नवम्बर 1988) रहीं। वे लाभ समिति, की अध्यक्षा और सदस्य, व्यापार सलाहकार समिति, राज्य सभा (1986-88) भी रहीं।
उन्हें वर्ष 1991 में दसवीं लोक सभा (संसद के निचले सदन) के लिए निर्वाचित किया गया और उन्होंने 1991 में अध्यक्षा, सदन समिति, लोक सभा के रूप में भी कार्य किया।
श्रीमती पाटिल को 8 नवंबर 2004 को राजस्थान की राज्यपाल के रूप में नियुक्त किया गया। उन्होंने भारत के राष्ट्रपति पद पर निर्वाचन के लिए 22 जून 2007 को राज्यपाल के पद से इस्तीफा दे दिया।
अन्य धारित पद
श्रीमती प्रतिभा देवीसिंह पाटिल अध्यक्षा-प्रदेश कॉन्ग्रेस समिति महाराष्ट्र (1988-1990), राष्ट्रीय शहरी सहकारी बैंक एवं ऋण संस्थाओं की निदेशक, भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ की शासी परिषद की सदस्य रही हैं।
सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियाँ
उन्होंने महिलाओं के कल्याण के लिए कार्य किया और मुम्बई, दिल्ली में कामकाजी महिलाओं के लिए हॉस्टल, ग्रामीण युवाओं के लाभ हेतु जलगांव में इंजीनियरिंग कॉलेज के अलावा श्रम साधना ट्रस्ट की स्थापना की। श्रीमती पाटिल ने महिला विकास महामण्डल, जलगांव में दृष्टिहीन व्यक्तियों के लिए औद्योगिक प्रशिक्षण विद्यालय और विमुक्त जमातियों तथा बंजारा जनजातियों के निर्धन बच्चों के लिए एक स्कूल की स्थापना की।
विशेष रुचियाँ
श्रीमती पाटिल की विशेष रुचि ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास और महिलाओं के कल्याण में है।
भ्रमण किए गए देश
श्रीमती प्रतिभा देवीसिंह पाटिल ने अनेक यात्राएं की है और इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ सोशल वेलफेयर कॉन्फ्रेंस, नैरोबी और पोर्टे रीको में भाग लिया। उन्होंने 1985 में इस सम्मेलन में शिष्टमण्डल के सदस्य के रूप में बुल्गारिया में, महिलाओं की स्थिति पर ऑस्ट्रिया के सम्मेलन में शिष्टमण्डल की अध्यक्ष के रूप में, लंदन में 1988 के दौरान आयोजित राष्ट्रमण्डलीय अधिकारी सम्मेलन में, चीन के बीजिंग शहर में विश्व महिला सम्मेलन में भाग लिया।
अन्य रुचियाँ
श्रीमती प्रतिभा देवीसिंह पाटिल ने जलगांव जिले में महिला होम गार्ड का आयोजन किया और 1962 में उनकी कमांडेंट थीं, वे राष्ट्रीय सहकारी शहरी बैंक और ऋण संस्थाओं की उपाध्यक्ष रहीं तथा बीस सूत्रीय कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति, महाराष्ट्र की अध्यक्षा थीं।
विशेष उपलब्धियाँ
श्रीमती प्रतिभा देवीसिंह पाटिल ने अमरावती में दृष्टिहीनों के लिए एक औद्योगिक प्रशिक्षण विद्यालय, निर्धन और जरूरतमंद महिलाओं के लिए सिलाई कक्षाओं, पिछड़े वर्गों और अन्य पिछड़े वर्गों के बच्चों के लिए नर्सरी स्कूल खोल कर उल्लेखनीय योगदान दिया तथा किसान विज्ञान केन्द्र, अमरावती में किसानों को फसल उगाने की नई एवं वैज्ञानिक तकनीकें सिखाने, संगीत और कम्प्यूटर की कक्षाएं आयोजित की।
श्रीमती प्रतिभा पाटिल का विवाह डॉ. देवीसिंह रामसिंह शेखावत के साथ हुआ।
उनका एक बेटा और एक बेटी है। |