संसद के कार्य न केवल विभिन्न प्रकृति के हैं किन्तु इनका मात्रा भी अधिक है। इसके निष्पादन का समय सीमित है। यह सभी विद्यायनी एवं अन्य मामलों का जो इसके समक्ष आते हैं बहुत विस्तृत जांच नहीं कर सकता है। इसका बहुत अधिक कार्य इसलिए समितियों में किए जाते हैं।
संसद के दोनों सदनों में कुछ अपवाद सहित समान समिति संरचना है,। उनकी नियुक्ति, पद का कार्यकाल, व्यवसाय करने के कार्य और इसकी प्रक्रिया भी कमोबेश समान हैं संविधान के अनुच्छेद 118 (1) के अध्याधीन दो सदनों द्वारा बनाए गए नियमों के तहत विनियमित होती है।
मौटे तौर पर संसदीय समितियां दो प्रकार की होती हैं - स्थायी समितियां और तदर्थ समितियां। पहले वालों का चुनाव और उनकी नियुक्ति प्रत्येक वर्ष होती है या समय समय पर होती है और उनके कार्य कमोबेश लगातार रूप से चलते रहते हैं बाद वाली तदर्थ आधार पर नियुक्त की जाती हैं जैसे जैसे आवश्यकता उत्पन्न होती है। और उनको सौंपे गए कार्य जैसे ही पूरा करती हैं वे समाप्त हो जाती हैं।
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