अखिल भारतीय सेवाएं
स्वतंत्रता के पहले; भारतीय सिविल सेवा (आईसीएस) भारत में सभी सेवाओं में वरिष्ठतम थी। आईसीएस के आलवा भारतीय पुलिस सेवा भी थी। स्वतंत्रता के बाद ऐसा अनुभव किया गया कि यद्यपि आईसीएस शाही काल की बपौती थी, राष्ट्र की एकता, अखण्डता और स्थिरता को बनसए रखने के लिए अखिल भारतीय सेवाओं की आवश्यकता थी। इसके अनुसार केंद्र और राज्यों के लिए एक समान एक या अधिक अखिल भारतीय सेवाओं का सृजन करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 312 में एक प्रावधान किया गया। भारतीय प्रशासनिक सेवा और भारतीय पुलिस सेवा संविधान के अनुच्छेद 312 की तर्ज पर संसद द्वारा गठित होती है। संविधान के लागू होने के बाद, एक नया अखिल भारत सेवा अर्थात भारतीय वन सेवा वर्ष 1966 में सृजित की गई। अखिल भारत की समान विशिष्ठता यह है कि इन सेवाओं के सदस्यों की नियुक्ति केंद्र द्वारा की जाती है परन्तु उनकी सेवाएं विभिन्न राज्य संवर्गों में दी जाती हैं और उनके लिए राज्य और केंद्र दोनों के अधीन सेवा देने का दायित्व होता है। अखिल भारत सेवाओं की ये पहलू भारतीय संघ की केंद्रीय विशेषता को मजबूत करते है।
तीन अखिल भारत सेवाओं अर्थात भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) और भारतीय वन सेवा (आईएफएस) में कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय आईएएस का संवर्ग नियंत्रण प्राधिकारी है। सभी तीन सेवाओं की नियुक्ति यूपी एससी द्वारा की जाती है। इन अधिकारियों की नियुक्ति और इनका प्रशिक्षण केंद्र सरकार द्वारा किया जाता है और उन्हें विभिन्न राज्य संवर्गों में आबंटित किया जाता है। तीन संयुक्त संवर्ग सहित वर्तमान में 24 राज्य संवर्ग हैं, अर्थात् (i) असम और मेघालय, (ii) मणिपुर और त्रिपुरा (iii) अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम और संघ राज्य क्षेत्र (एजीएमयूटी)।
केंन्द्रीय सचिवालय सेवाएं
केंद्रीय सचिवालय की तीन सेवाएं हैं, अर्थात (i) केंद्रीय सचिवालय सेवाएं (सीएसए) (ii) केंद्रीय सचिवालय आशुलिपिक सेवाएं (सीएसएसएस) (iii) केंद्रीय सचिवालय लिपिकीय सेवा (सीएससीएस)। सीएसएसका अनुभाग अधिकारी ग्रेड और सहायक ग्रेड, आशुलिपि ग्रेड डीसीए और बी (सम्मिलित) रूप से सीएसएसएस और अवरश्रेणी लिपिक और उच्च श्रेणी लिपिक विकेंद्रीकृत हैं। श्री एसएसएस के प्रधान निजी सचिव और वरिष्ठ प्रधान निजी सचिव और सेलेक्शन ग्रेड और सीएसएस का ग्रेड I केंद्रीकृत हैं। केंद्रीकृत ग्रेड में नियुक्ति और पदोन्नति अखिल सचिवालय आधार पर की जाती है। विकेंद्रीकृत ग्रेडों के संबंध में कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग वरिष्ठता कोटा के लिए पदोन्नति का जोन निर्धारित करने के लिए विभिन्न संवर्गों की कुल आवश्यकताओं की निगरानी एवं उसका मूल्यांकन करता है और ओपन प्रतियोगिता एवं विभागीय परीक्षा के जरिए सीधी भर्ती और विभागीय परीक्षा कोटा के लिए केंद्रीकृत भर्ती की व्यवस्था करता है।
गृह मंत्रालय संबंधी स्थायी संसदीय समिति की अनशंसा के अनुपालन में सरकार ने फरवरी 2001 में सीएसएस की संवर्ग पुनर्संरचना संबंधी समिति का गठन किया है। समिति ने फरवरी 2002 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की इसमें अनेकानेक कार्यवाहियों की सिफारिश की गई है। सावधानी पूर्वक विचार करने के बाद सरकार की गई है। सावधानीपूर्वक विचार करने के बाद सरकार ने सी एसएस के कार्मिकों के कैरियर संभावना सुधारने के लिए अक्तूबर 2003 में अनेक निर्णय लिया है।
संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी)
केंद्रीय सरकार के तहत समूह 'क' और 'ख' राजपत्रित पदों पर नियुक्ति भर्ती के लिए और विभिन्न सेवा संबंधी विषयों पर सलाह देने के लिए संविधान में स्वतंत्र निकाय की व्यवस्था करता है, जो संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के रूप में जाना जाता है। आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा छह वर्ष के कार्यकाल के लिए की जाती है या जब तक वे 65 वर्ष की आयु प्राप्त नहीं कर लेते, जो भी पहले हो। के लिए की जाती है। स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए जो सदस्य नियुक्ति के समय सेवारत होते हैं वे आयोग में नियुक्त होते ही सेवानिवृत्त माने जाते हैं। अध्यक्ष और सदस्य सरकार के अधीन और नियुक्ति के पात्र नहीं होते हैं। संविधान मेंदिए गए कारणों को छोड़कर उन्हें पद से हटाया नहीं जा सकता है।
कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी)
कर्मचारी चयन आयोग जो आरंभ में अधीनस्थ सेवा आयोग के रूप में जाना जाता था, की स्थापना 1 जुलाई, 1976 में की गई। इसे (i) सरकार के विभिन्न मंत्रालयों/विभागों और संबंद्ध और अधीनस्थ कार्यालयों में सभी अराजपत्रित समूह 'ख' पदों जिनका वेतनमान 6500-10500 रुपए होता है, और (ii) सरकार के विभिन्न मंत्रालयों/विभागों और उनके संबंद्ध और अधीनस्थ कार्यालयों में उन पदों को छोड़कर जिन्हें विशेष रूप से कर्मचारी चयन आयोग के दायरे से बाहर रखा गया है, सभी गैर तकनीकी समूह 'ग' पदों में भर्ती का कार्य सौंपा गया है। आयोग कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग का संबंद्ध कार्यालय है, और इसमें अध्यक्ष, दो सदस्य और सचिव सह परीक्षा नियंत्रक होते हैं। अध्यक्ष/सदस्यों का कार्यकाल पांच वर्ष या उनकी 62 वर्ष की आयु प्राप्त करने तक जो भी पहले हो होता है आयोग का मुख्यालय और उत्तरी क्षेत्र के लिए इसके कार्यालय नई दिल्ली में है। केंद्रीय, पश्चिमी, पूर्वी, उत्तर पूर्व, दक्षिणी और कर्नाटक केरल क्षेत्र के कार्यालय क्रमश: इलाहाबाद, मुम्बई, कोलकाता, गुवाहाटी, चेन्नई और बैंगलोर में हैं। इसके मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ क्षेत्र के और उत्तर पश्चिम, क्षेत्र के उप क्षेत्रीय कार्यालय क्रमश: रायपुर और चंडीगढ़ में है। .
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