भारतीय डायस्पोरा पर उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों के आधार पर भारत सरकार ने भारत की विदेशी नागरिकता (ओसीआई) देने का निर्णय लिया, जिसे आमतौर पर ‘दोहरी नागरिकता’ कहते हैं। विशिष्ट श्रेणी के भारतीय मूल के व्यक्ति, जैसा विवरणिका में बताया गया है कि जो लोग भारत से प्रवास कर गए और फिर बंग्लादेश और पाकिस्तान के अतिरिक्त अन्य किसी देश की नागरिकता ग्रहण की, उन्हें भारत की विदेशी नागरिकता पाने का पात्रता है, बशर्ते उनका गृह देश अपने स्थानीय कानूनों के तहत दोहरी नागरिकता की अनुमति देता है।
ओसीआई के तहत पंजीकृत व्यक्तियों को मताधिकार, लोक सभा/राज्य सभा/विधान मंडल/परिषद् में निर्वाचन, कोई संवैधानिक पद जैसे राष्ट्रपति, उप राष्ट्रपति, उच्चतम न्यायालय/उच्च न्यायालय आदि में न्यायधीश के पद पर कार्य करने का अधिकार नहीं दिया गया है। पंजीकृत ओसीआई को निम्नलिखित लाभों की पात्रता होगी :
- भारत में बार-बार प्रवेश, बहु प्रयोजन पूरे जीवन का वीजा;
- भारत में कितनी भी लंबी अवधि तक ठहरने पर पुलिस अधिकारियों को रिपोर्ट नहीं करने की छूट ;
- कृषि संबंधी या पौधरोपण संपत्तियों में अधिग्रहण के अतिरिक्त वित्तीय, आर्थिक और शैक्षिक क्षेत्रों में अनिवासी भारतीयों के साथ समकक्षता।
ओसीआई के रूप में पंजीकृत एक व्यक्ति को नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 5 (1) (जी) के तहत भारतीय नागरिकता प्रदान करने का आवेदन करने की पात्रता है। यदि वह पिछले 5 वर्षों से ओसीआई के रूप में पंजीकृत है और आवेदन करने से पहले पांच वर्षों में से एक वर्ष के दौरान भारत में रहा हो।
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स्रोत : राष्ट्रीय पोर्टल विषयवस्तु प्रबंधन दल |
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