महत्वपूर्ण परिभाषाएँ: अनिवासी भारतीय, विदेशी निगम निकाय और पीआईओ
अनिवासी भारतीय
एक भारतीय नागरिक जो रोजगार/व्यापार करने, एक व्यवसाय करने के लिए भारत से बाहर रहता है या परिस्थितियों के चलते विदेश में अनिश्चित अवधि तक रहने की संकेत देता है, उसे अनिवासी नागरिक कहते हैं (संयुक्त राष्ट्र के संगठनों में तैनात व्यक्ति और अस्थायी कार्यों पर केंद्रीय/राज्य सरकारों और सार्वजनिक क्षेत्र प्रतिष्ठानों द्वारा प्रतिनियुक्त अधिकारियों को भी अनिवासी भारतीय कहा जाता है)। भारतीय मूल के अनिवासी विदेशी नागरिकों को कुछ विशिष्ट सुविधाओं के प्रयोजन हेतु अनिवासी भारतीय के समकक्ष माना जाता है।
विदेश निगम निकाय (ओसीबी)
विदेश निगम निकाय (ओसीबी) ऐसे निकाय हैं जिन पर भारतीय राष्ट्रीयता या भारत के बाहर रहने वाले मूल निवासी का स्वामित्व होता है और इनमें निदेशी कम्पनियां, भागीदारी फर्में, संस्थाएँ और अन्य नैगम निकाय शामिल है, जिनका स्वामित्व प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से भारतीय राष्ट्रीयता या भारत के बाहर के मूल निवासी द्वारा कम से कम 60 प्रतिशत तक होता है, क्योंकि विदेशी ट्रस्ट, जिसमें कम से कम 60 प्रतिशत लाभकारी ब्याज उक्त व्यक्ति द्वारा वसूली योग्य नहीं है। ऐसा स्वामित्व वाला ब्याज उनके द्वारा ही रखा जाना चाहिए उसे मनोनीत नहीं बनाया जाना चाहिए। अनिवासी भारतीयों को दी जाने वाली विभिन्न सुविधाएँ ओसीबी के कुछ अपवादों के साथ उपलब्ध होती हैं, जब तक कि अनिवासी भारतीयों द्वारा उनमें स्वामित्व/लाभकारी ब्याज कम से कम 60 प्रतिशत बना रहता है।
भारतीय मूल के व्यक्ति (पीआईओ)
भारत में शेयरों/प्रतिभूतियों में निवेश और बैंक खातों को खोलने और उनके रखरखाव की सुविधाओं का लाभ उठाने के प्रयोजन से, भारतीय मूल के व्यक्ति का अर्थ है पाकिस्तान या बंगलादेश के अतिरिक्त किसी देश का नागरिक, जिसके पास भारतीय पासपोर्ट हो, उसके माता-पिता अथवा बाबा-नाना भारतीय संविधान या नागरिकता अधिनियम, 1955 (1955 का 57) के माध्यम से भारत के नागरिक रहे हों।,
- यदि व्यक्ति भारतीय नागरिक का जीवन साथी है
- उसके पास किसी भी समय भारतीय पासपोर्ट है वह स्वयं या उसके माता-पिता या बाबा-नाना भारतीय संविधान या नागरिकता अधिनियम, 1955 (1955 का 57) के माध्यम से भारत के नागरिक थे।
- विदेशी निगम निकायों में अनिवासी भारतीयों के स्वामित्व/लाभकारी हित का प्रमाणपत्र।
अचल सम्पत्तियों में निवेशों के लिए भारतीय मूल के व्यक्ति का अर्थ है एक ऐसा व्यक्ति जो पाकिस्तान या बंगला देश या अफगानिस्तान या भूटान या श्रीलंका या नेपाल या चीन या इरान का नागरिक नहीं है।
- जिसके पास किसी भी समय भारतीय पासपोर्ट है
- जिसके पास किसी भी समय भारतीय पासपोर्ट है वह स्वयं या उसके माता-पिता या बाबा-नाना भारतीय संविधान या नागरिकता अधिनियम, 1955 (1955 का 57) के माध्यम से भारत के नागरिक थे।
विदेशी निगम निकायों में अनिवासी भारतीयों के स्वामित्व/लाभकारी हित का प्रमाणपत्र
यह स्थापित करने के लिए कि अनिवासी भारतीयों द्वारा किसी ओसीबी में स्वामित्व/लाभकारी हित 60 प्रतिशत से कम नहीं है, संबंधित निकाय/न्यास द्वारा ओएसी प्रपत्र में एक विदेशी लेखा परीक्षक/चार्टर्ड लेखाकार/प्रमाणित सार्वजनिक लेखाकार से एक प्रमाणपत्र जमा करना होता है, जहाँ स्वामित्व/लाभकारी हित प्रत्यक्ष रूप से अनिवासी भारतीय के पास ओएसी प्रपत्र के रूप में है, जो अप्रत्यक्ष रूप से अनिवासी भारतीय के पास है और उक्त स्वामित्व हित वास्तव में उनके पास है और उनकी क्षमता मनोनीत होने की नहीं है। इसके बाद, उपरोक्त बिन्दुओं के आधार पर ओसीबी के प्रबंध निदेशक या मुख्य कार्यपालक अधिकारियों द्वारा हस्ताक्षरित एक सरल प्रमाणपत्र किया जाए।
टिप्पणी : करीबी स्थित ओसीबी के मामले में (अर्थात् जहाँ शेयर होल्डर एक ही परिवार के हों अथवा आपस में एक दूसरे के साथ करीबी संबंध रखते हों, पहले मामले में ओएसी/ओएसी 1 के रूप में प्रमाणपत्र इस आशय के दस्तावेज़ी साक्ष्य के साथ जमा किए जाएँ कि शेयर होल्डर एक ही परिवार के हैं या एक दूसरे के साथ करीबी संबंध रखते हैं। इसके बाद ओएसी/ओएसी 1 का वार्षिक रूप से जमा करना अनिवार्य नहीं होता है और यह पर्याप्त होगा कि ओसीबी के प्रबंध निदेशक/मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा हस्ताक्षरित एक प्रमाणपत्र जमा किया जाए और इसमें बताया जाए कि पिछले प्रमाणपत्र जमा करने के बाद शेयर होल्डिंग पैटर्न में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
अनिवासी भारतीयों के लिए निवेश नीति
अनिवासी भारतीयों की निवेश संभाव्यता को पहचानते हुए सरकार की ओर से भारतीय कम्पनियों में उनके निवेश को आकर्षित करने के लिए निरंतर आधार पर अनेक कदम उठाए जा रहे हैं। अनिवासी भारतीयों के लिए उपलब्ध कुछ वर्तमान निवेश योजनाओं में शामिल हैं निवेश की गई पूँजी का पूरा लाभ पाने के लिए शत प्रतिशत इक्विटी तक निवेश की सुविधा तथा औद्योगिक नीति, 1991 के परिशिष्ट-3 में बताए गए उच्च प्राथमिकता उद्योगों में इन पर प्रोद्भूत आय। इनमें शत प्रतिशत निर्यात उन्मुख इकाइयाँ, आवास और सम्पदा विकास कम्पनियाँ आदि शामिल हैं।
अनिवासी भारतीय/भारतीय मूल के व्यक्ति/ओसीबी को माध्यमिक बाजारों के ज़रिए पोर्ट फोलियो निवेश बनाने की अनुमति भी दी गई है। वर्ष 1998-99 में घोषित रियायतों के संदर्भ में एक अनिवासी भारतीय के लिए निवेश सीमा 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 5 प्रतिशत की गई है, सभी अनिवासी भारतीयों द्वारा कुल पोर्ट फोलियो निवेश सीमाएँ कम्पनी की जारी और भुगतान की गई पूँजी के 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत की गई है। सकल निवेश सीमा अलग होगी और इसमें एफआईआई पोर्टफोलियो निवेश सीमाएँ शामिल नहीं होंगी।
अनिवासी भारतीयों/ओसीबी के लिए उपलब्ध सुविधाएँ
भारत में निवेशों के लिए अनिवासी भारतीयों/ओसीबी के लिए उपलब्ध विभिन्न सुविधाएँ इस प्रकार हैं :
- भारत में बैंक खातों का रखरखाव
- भारतीय फर्मों/कम्पनियों के शेयरों/प्रतिभूतियों में निवेश और जमा करना।
- भारत में अचल सम्पत्ति में निवेश
बैंक खाते
अनिवासी भारतीयों/भारतीय मूल के व्यक्तियों/ओसीबी को भारत में बैंक खाते खोलने की अनुमति है, जिसमें वे विदेश से लाए धन, विदेश से लाई गई विदेशी मुद्रा या भारत में कानूनी रूप से उन्हें देय राशि एक अधिकृत डीलर की सहायता से जमा कर सकते हैं।
ये खाते बैंकों में खोले जा सकते हैं, जो विशेष रूप से भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा उनकी ओर से (अधिकृत डीलर) द्वारा अधिकृत किए गए हों। अनिवासी भारतीयों के खाते 5 प्रकार के होते हैं। :
- अनिवासी भारतीय (बाह्-य) रु. का खाता (एनआरई खाते) - इसमें रु. के विभाजनों को जमा किया जाता है और यह बचत खाते, चालू खाते या सावधि जमा खाते के रूप में हो सकते हैं।
- साधारण अनिवासी भारतीय रु. खाता (एनआरओ) - इसमें रु. के विभाजन में गैर प्रतिवेदन योग्य खाते शामिल हैं और ये भी बचत, चालू, आवर्ती या सावधि जमा के रूप में हो सकते हैं। ये खाते भारत के निवासियों के साथ संयुक्त रूप से खोले जा सकते हैं।
- गैर निवासी (गैर प्रतिवेदन योग्य) रु. जमा खाते (एनआरएनआर खाते) - अनिवासी भारतीयों/भारतीय मूल के व्यक्तियों/ओसीबी, अन्य अनिवासी व्यक्तियों/इकाइयों को ये खाते खोलने की अनुमति है। ये खाते विदेश से मुक्त रूप से परिवर्तन योग्य विदेशी मुद्रा कोष के अंतरण, या एनआरई/एफसीएनआर से अंतरण द्वारा खोले जा सकते हैं। यह जमा राशि संयुक्त रूप से एक निवासी की हो सकती है।
- अनिवासी (विशेष) रु. खाता भारतीय बैंकों में - ये खाते अनिवासी भारतीयों/भारतीय मूल व्यक्तियों के लिए बनाए गए है तथा ये निवासियों द्वारा बनाए गए रु. खाते के बराबर होंगे। अनिवासी भारतीय/भारतीय मूल के व्यक्ति भारत के बैंकों में अनिवासी (विशेष) रु. खाते खोल सकते हैं, जिनमें वे ही सुविधाएँ और प्रतिबंध होंगे जो निवासियों द्वारा भारत में खोले गए रु. खातों पर लागू होते हैं, ये खाते उनके द्वारा खोले गए खातों और/या इस पर अर्जित आय/ब्याज से संबंधित होते है।
- विदेशी मुद्रा (अनिवासी) खाता (बैंक) (एफसीएनआर (बी) खाते) - अनिवासी भारतीयों/भारतीय मूल के व्यक्तियों/ओसीबी को अमेरिकी डॉलर, स्टर्लिंग पाउण्ड, ड्यूकमार्क, जापानी येन और यूरो में ये खाते खोलने की सुविधा है। ये खाते सावधि जमा के रूप में खोले जा सकते हैं।
प्रत्यक्ष निवेश अवसर
भारत में अनिवासी भारतीय और ओसीबी इस प्रकार निवेश कर सकते हैं।
- रिपेट्रिएशन लाभों सहित स्वचालित मार्ग के तहत निवेश
- सरकारी अनुमोदन से निवेश
- रिपेट्रिएशन लाभों सहित अन्य निवेश
- रिपेट्रिएशन लाभों के बिना शत प्रतिशत इक्विटी सहित निवेश
- रिपेट्रिएशन लाभों के बिना अनिवासी भारतीयों/ओसीबी द्वारा अन्य निवेश
उपरोक्त पर अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें
अधिक जानकारी के लिए भारतीय रिजर्व बैंक की वेबसाइट देखें
पोर्टफोलियो निवेश
अनिवासी भारतीयों/ओसीबी को भारतीय कम्पनियों में रिपेट्रिएशन लाभ सहित या इसके बिना शेयरों/डिबेंचर (परिवर्तन योग्य और अपरिवर्तनीय) में पोर्टफोलियो निवेश करने की अनुमति है, बशर्तें इसकी खरीद स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से तथा एक अधिकृत डीलर की अभिनामित शाखा से किया गया हो। अनिवासी भारतीयों/ओसीबी को इस प्रयोजन के लिए रिजर्व बैंक द्वारा अधिकृत केवल एक शाखा को अभिनामित करना होगा।
पोर्टफोलियो निवेश पर अधिक जानकारी
सम्पत्ति में निवेश
भारत के बाहर रहने वाले निवासी या भारतीय मूल के व्यक्ति कुछ विशिष्ट शर्तों के अधीन पूर्व अनुमति के बिना कृषि भूमि/फॉर्महाउस/पौधरोपण सम्पत्ति के अलावा अन्य अचल सम्पत्ति का अधिग्रहण, अंतरण या किराए पर लेने का कार्य कर सकता है।
यद्यपि, भारत के अंदर या बाहर रहने वाले सभी व्यक्ति जो पाकिस्तान, बंगलादेश, श्रीलंका, अफगानिस्तान, चीन, ईरान, नेपाल या भूटान के नागरिक हैं, वे भारतीय रिजर्व बैंक की पूर्व अनुमति के साथ ही भारत में कोई अचल सम्पत्ति अधिग्रहीत या अंतरित कर सकते हैं।
भारत के बाहर रहने वाले निवासियों, जिन्हें भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा भारत के बाहर एक शाखा या कार्यालय या व्यापार स्थल (समन्वय कार्यालय के अतिरिक्त), को भारत में अचल सम्पत्ति अधिग्रहीत करने की सामान्य अनुमति भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा दी गई है, इन मामलों में अचल सम्पत्ति के अधिग्रहण के 90 दिनों के अंदर भारतीय रिजर्व बैंकों में एक निर्धारित प्रपत्र में घोषणा जमा करनी होती है।
पीआईओ कार्ड योजना
भारत सरकार ने भारतीय मूल के व्यक्तियों के लिए एक व्यापक योजना ''पीआईओ कार्ड योजना'' आरंभ की है। इस योजना की पात्रता में दुनिया के किसी भी कोने में, कुछ निर्दिष्ट देशों के अलावा, बसने वाली चौथी पीढ़ी (पितामह के पिता) के भारतीय मूल के व्यक्ति शामिल हैं। यह कार्ड संबंधित भारतीय दूतावासों/उच्च आयोगों/वाणिज्यिक दूतावासों के माध्यम से पात्र आवेदक को जारी किया जाएगा। यह सुविधा भारत में लंबे समय के वीसा पर रहने वाले लोगों को भी विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण अधिकारी (दिल्ली, मुम्बई, कोलकाता, चेन्नै) द्वारा उपलब्ध कराए जाएगे। इस कार्ड का शुल्क 20 वर्ष की वैधता के साथ 1000 अमेरिकी डॉलर होगा।
पीआईओ कार्ड प्रदान/नवीकरण करने का फॉर्म
पीआईओ कार्ड योजना पर और अधिक जानकारी
कर
कर दाताओं को अपने करों की कार्ययोजना पहले से तैयार करने तथा लागू और मंहगी याचिका को टालने के लिए आयकर अधिनियम, 1961 के तहत अग्रिम नियम की एक योजना बनाई गई है। अग्रिम नियमों का प्राधिकरण भी गठित किया गया है। एक कर दाता इन मुद्दों पर प्राधिकरण से बाध्यकारी नियम प्राप्त कर सकता है, जो उसकी कर देयता के निर्धारण से उठे हैं। एक अनिवासी अथवा निवासियों की एक विशिष्ट श्रेणी के लोगों द्वारा कानून के प्रश्न या किसी लेनदेन से उत्पन्न तथ्य/प्रस्तावित लेनदेन पर प्राधिकरण से बाध्यकारी नियम प्राप्त किए जा सकते हैं, जो उनकी कर देयता के निर्धारण के लिए संगत होंगे।
भारत में अनिवासी कर देयता
सुविधा प्रदानकारी अभिकरण
अनिवासी भारतीयों/ओसीबी निवेश से संबंधित मामलों में शामिल प्रमुख विनियामक और सुविधा प्रदानकारी अभिकरण इस प्रकार हैं।
अनिवासी भारतीय निवेश पर और अधिक जानकारी
स्रोत : राष्ट्रीय पोर्टल विषयवस्तु प्रबंधन दल |
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