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यात्रा संबंधी सलाह
 

भारत समृद्ध सांस्‍कृतिक विरासत एवं भौगोलिक सौंदर्य की भूमि है। भारत में पर्यटकों की रूचि के अनेक स्‍थल हैं तथा प्रत्‍येक वर्ष अनेक विदेशी पर्यटक, राष्‍ट्र के शाश्‍वत सौंदर्य का अन्‍वेषण करने के लिए विश्‍व के विभिन्‍न भागों से यहॉं आते हैं। पर्यटक विभिन्‍न प्रयोजनों के लिए यहां आते हैं यथा पर्यटन, व्‍यवसाय, शिक्षा, पारिवारिक पुनर्मिलन इत्‍यादि। ऐसे कुछ दिशानिर्देश है जिनका अनुसरण करने की सलाह इन विदेशी अतिथियों को दी जाती है।

ये दिशानिर्देश निम्‍न प्रकार हैं :

  • विदेशी पर्यटकों से अपेक्षित है कि वे अपने रिहायश के देश में या समीपस्‍थ देश में भारतीय मिशन से वीजा प्राप्‍त करें। कुछ प्रतिबंधित/संरक्षित क्षेत्रों में जाने के लिए उन्‍हें ए‍क वैध परमिट की आवश्‍यकता है।

  • आगमन/प्रस्‍थान पर उन्‍हें पोतावरोहण/पोतरोहण के कार्ड भरने होंगे।

  • पीत ज्‍वर वाले देशों से आने वाले या वहॉं से होकर आने वाले विदेशियों को एक वैध टीकाकरण प्रमाणपत्र प्रस्‍तुत करना होगा।

  • हेपेटेटाइटिस ए, हेपाटेटीज़ बी, रैबीज़ तथा टायफायड जैसे टीकाकरण की अनुशंसा की गई है। भारत में हैजा, डेंगू ज्‍वर, आंत्रशोध, मलेरिया तथा मेनिंजाइटिस जैसे कुछ स्‍वास्‍थ्‍य जोखिम है। यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे इनके लिए सुरक्षोपाय करें।

  • भारत में आने वाले विदेशियों, जो दीर्घावधि वीज़ा धारक (180 दिन से अधिक) हैं, से अपेक्षित है कि वे आगमन के 15 दिनों के भीतर समीपस्‍थ विदेशी पंजीकरण कार्यालय (एफ आर आर ओ) से पंजीकरण प्रमाणपत्र तथा आवासीय परमिट प्राप्‍त करें। एफ आर आर ओ में पंजीकृत विदेशियों से अपेक्षित है कि वे अपने पतों में परिवर्तन की सूचना दें।

  • पंजीकरण अधिकारियों द्वारा जारी पंजीकरण प्रमाणपत्र भारत छोड़ते समय निकासी पत्‍तन/चेकपोस्‍ट पर आप्रासन अधिकारी को सौंप दिए जाने चाहिए।

  • सीमाशुल्‍क हवाई पत्‍तन/समुद्री पत्‍तन से भारत के बाहर किसी स्‍थान की यात्रा के लिए पोतारोहण करने वाले यात्रियों द्वारा अधिकांश देशों को 500 रूपए का विदेश यात्रा कर तथा अफगानिस्‍तान, बांगलादेश, भूटान, बर्मा, नेपाल, पाकिस्‍तान, श्रीलंका एवं मालदीव की यात्रा के लिए 150 रूपए का विदेश यात्रा कर अदा किया जाना अपेक्षित है।

  • भारतीय वन्‍यजीवन (संरक्षण) अधिनियम में वन्‍यजीव व्‍यापार के सभी स्‍वरूपों को प्रतिबंधित किया गया है। अधिनियम के उपबंधों के उल्‍लंघन के लिए भारी अर्थदंड एवं कारावास की सजा दी जा सकती है। अत: विदेशियों को सलाह दी जाती है कि वे किसी वन्‍य जीव या उनके उत्‍पादों तथा व्‍युत्‍पादों यथा हाथीदंत की वस्‍तुएं, फर तथा खाल न खरीदें।

  • भारत में उत्‍तर में जलवायु साधारणतया, विशेष रूप से सितम्‍बर एवं मार्च में अपेक्षाकृत ठंडी होती है। दक्षिणी क्षेत्र नवम्‍बर से जनवरी में सर्वाधिक ठंडा होता है। जून में, हवाएं तथा गर्म सतह धाराएं उत्‍तरी तथा पश्चिमी दिशा में संचलन आरम्‍भ कर देती हैं, ये हिन्‍द महासागर से निकलती है तथा अरब की खाड़ी की ओर जाती है। इससे दक्षिण पश्चिम मानसून का दृश्‍यप्रपत्र सृजित होता है तथा इससे पश्चिमी तट पर भारी वर्षा होती है। अक्‍तूबर तथा दिसम्‍बर के बीच पूर्वोत्‍तर मानसून नामक समरूप जलवायु पैटर्न बंगाल की खाड़ी में सृजित होता है जो पूर्वी तट पर भारी वर्षा लाता है।

  • विदेशी पर्यटकों को सलाह दी जाती है कि वे उन स्‍थानों में, जहां का वे दौरा करना चाहते हैं, यात्रा एवं आवास व्‍यवस्‍थाओं के संबंध में सम्‍पूर्ण अनुसंधान करें।

  • भारत में कुछ धार्मिक स्‍थलों में वेशभूषा कोड होते है जैसे अपने सिर को ढकना, नंगे पैर जाना इत्‍यादि। पर्यटकों को सलाह दी जाती है कि वे उनका अनुपालन करें ताकि उनका आचरण संबंधित समुदाय के धार्मिक‍ मनोभावों के प्रति अपमानजनक प्रतीत न हो।
 
 

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