बुनियादी सेवाएं
भारतीय टेलीकॉम विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) की सिफारिशों के आधार पर, सरकार ने छह सेवा क्षेत्रों जहां निजी लाइसेंसशुदा पहले ही मौजूद थे, सहित सभी सेवा क्षेत्रों में नई बसिक सेवा लाइसेंसों को जारी करने के लिए 25 जनवरी 2001 को दिशानिर्देश जारी किए। देश को बुनियादी सेवा लाइसेंस प्रदान करने के लिए 21 क्षेत्रीय सेवा क्षेत्रों में विभाजित किया गया है।
बुनियादी सेवा प्रचालकों को अपने सेवा क्षेत्र के भीतर लम्बी दूरी पर अपना ट्रैफिक चलाने की अनुमति दी गई है।
एकीकृत लाइसेंसिंग व्यवस्था की शुरूआत: सरकार द्वारा 31 अक्तूबर 2003 का ट्राई की सिफारिशों को स्वीकार किए जाने के परिणामस्वरूप, दूरसंचार विभाग द्वारा एनटीपी-99 में एक शुद्धिपत्र जारी किया गया जिसमें दूरसंचार सेवाओं के लिए एकीकृत लाइसेंस और एकीकृत एक्सेस (बेसिक और सेलुलर) सेवा के लिए लाइसेंस शामिल किया गया।
राष्ट्रीय लम्बी दूरी की सेवा
राष्ट्रीय लम्बी दूरी (एनएलडी) की सेवा 13 अगस्त, 2000 निजी क्षेत्र के लिए खोली गई थी। 2,500 करोड़ रु. के निवल मूल्य और 250 करोड़ रु. की चुकता पूंजी वाली भारतीय पंजीकृत कम्पनियां आवेदन करने की पात्र है। प्रचालकों की संख्या पर कोई सीमा नहीं है। एनएलडी प्रचालक देश में अन्त: सर्किल ट्रैफिक चला सकता है। एनएलडीओ का लाइसेंस गैर-अनन्य आधार पर, 20 वर्ष की अवधि के लिए जिसे एक बार में 10 वर्ष बढ़ाया जा सकता है, जारी किया जाता है।
अंतरराष्ट्रीय लम्बी दूरी की सेवा
अंतरराष्ट्रीय लम्बी दूरी (आईएलडी) की सेवा मूलत: नेटवर्क कैरिज सेवा है जो विदेशी कैरियरों द्वारा प्रचालित नेटवर्क को अंतरराष्ट्रीय सम्पर्क मुहैया कराते हैं। नई टेलीकॉम नीति 1999 के अनुसार, सरकार ने 1 अप्रैल 2002 से अंतरराष्ट्रीय लम्बी दूरी की सेवा को निजी प्रचालकों के लिए खोल दिया। प्रचालकों की संख्या पर कोई सीमा नहीं हैं। 25 करोड़ रु. के लिए निवल मूल्य की भारतीय पंजीकृत कम्पनियां आवेदन करने की पात्र हैं। यह लाइसेंस करार की तिथि से 20 वर्ष की अवधि के लिए वैद्य होता है।
अवसंरचना प्रदाता श्रेणी-II (आईपी-II)
आईपी-II लाइसेंसशुदा प्रचालक को शुरू से अत्न्त तक बैंड विड्थ अर्थात् संदेश ले जाने की डिजिटल पारेषण क्षमता को पट्टे पर देने/किराए पर देने/बेचने की अनुमति है। इसे 13 अगस्त 2000 को निजी क्षेत्र के लिए खोला गया था। यह लाइसेंस करार की तिथि से 20 वर्ष की अवधि के लिए वैद्य होता है।
अवसंरचना प्रदाता श्रेणी-I द्व (आईपी -I)
आईपी –I के लिए आवेदक कम्पनी को दूरसंचार विभाग के पास पंजीकरण कराना ज़रूरी होता है। आईपी-I के रूप में पंजीकृत कम्पनियां डार्क फाइबर, मार्गाधिकार, डक्ट स्पेस और टावर जैसी परिसंपत्तियां मुहैया करा सकते हैं। सभी भारतीय पंजीकृत कम्पनियां आवेदन करने के लिए पात्र हैं।
सेलुलर सेवाएं
यह देश सेलुलर मोबाइल टेलीफोन सेवा के लिए 19 टेलीकॉम सर्किल सेवा क्षेत्रों तथा चार मेट्रों सेवा क्षेत्रों में विभाजित किया गया हैं। प्रत्येक सेवा क्षेत्र में तीन निजी प्रचालक और एक राज्य के स्वामित्वाधीन प्रचालक है। इस समय 27 मिलियन से अधिक सेलुलर अभिदाता हैं और एक मिलियन से अधिक प्रति माह की दर पर बढ़ रहे हैं।
एकीकृत संदेश सेवा (यूएमएम)
एनटीपी-1999 के अनुसार वॉयस मेला/ऑटोटैकस सेवा की नई नीति एक नई सेवा नामत: एकीकृत संदेश सेवा (यूएमएस) का शामिल करके जुलाई 2001 में घोषित की गई थी। यूएमएस ऐसी प्रणाली है जिसके द्वारा वॉयस मेला, फैक्स और ई-मेल (तीनों) टेलीफोन उपकरण, फैक्स मशीन, मोबाइल फोन, इंटरनेट ब्राउज़र इत्यादि का प्रयोग करते हुए एक मेल-बाक्स से प्राप्त किए जा सकते हैं।
पब्लिक मोबाइल रेडियो ट्रंक सेवा संबंधी नीति
एनटीपी-1999 के अनुसार पब्लिक मोबाइल रेडियो ट्रंक सेवा (पीएमआरटीएस) से संबंधित नीति 1 नवम्बर 2001 को घोषित की गई थी। नई पीएमआरटीएस लाइसेंस केवल डिजिटल प्रौद्योगिकी में दिए जा रहे हैं। पीएसटीएन सम्पर्क को पीएमआरटीएस सेवा में अनुमति दी गई है। |