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शिक्षा
 

यह कार्यान्‍वयनकारी अभिकरणों द्वारा विभिन्‍न नीतिगत मापदण्‍डों के कार्यान्‍वयन के लिए विस्‍तृत कार्यनीति निर्धारित करता है।

राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति में यथा परिकल्पित राष्‍ट्रीय शिक्षा प्रणाली एक राष्‍ट्रीय पाठ्यचर्या संरचना पर आधारित है‍ जिसमें अन्‍य लचीले और क्षेत्र विशिष्‍ट घटकों के साथ साझेपन की बात कही गई है। इस नीति में जहां लोगों के लिए अवसर बढ़ाने पर बल दिया गया है, वहीं इसमें उच्‍चतर और तकनीकी शिक्षा की मौजूदा प्रणाली के समेकन की मांग भी की गई हैं। इसमें शिक्षा में कहीं अधिक स्‍तर पर राष्‍ट्रीय आय के कम से कम छह प्रतिशत का निवेश करने की जरूरत पर भी बल दिया गया है।

शिक्षा के क्षेत्र में केन्‍द्र और राज्‍य सरकारों को सलाह देने वाला उच्‍चतम सलाहाकारी निकाय केन्‍द्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड (सीएबीई) वर्ष 1920 में स्‍थापित किया गया था और किफायत करने के उपाय के तौर पर 1923 में समाप्‍त कर दिया गया था। इसे 1935 में पुन: जीवित किया गया था यह 1994 तक जारी रहा। इस तथ्‍य के बावजूद भी, कि विगत में केन्‍द्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड की सलाह पर महत्‍वपूर्ण निर्णय लिए जाते रहे थे और इसने शैक्षिक एवं सांस्‍कृतिक विकास से जुड़े मुद्दों की व्‍यापक जांच में और परामर्श देने में मंच मुहैया कराया था, मार्च 1994 में इसके विस्‍तारित कार्यकाल की समाप्ति पर दुर्भाग्‍यवश इसे पुनर्गठित नहीं किया गया। देश में हो रहे महत्‍वपूर्ण सामाजिक आर्थिक एवं सामाजिक-सांस्‍कृतिक घटनाक्रमों को देखते हुए, और राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति की समीक्षा जिसका समय आ गया है, के‍ लिए मौजूदा समय में सीएबीई के विशेष महत्‍व की भूमिका अदा करनी होगी। इसलिए यह बात जरूरी है कि केन्‍द्र और राज्‍य सरकारें तथा शिक्षाविद् एवं सभी हितों का प्रतिनिधित्‍व करने वाले लोग अपना विचार-विनिमय बढ़ाएं तथा शिक्षा में निर्णय लेने की सहभागी-प्रक्रिया का विकास करें जिससे हमारी राजनीतिक व्‍यवस्‍था की संघीय संरचना मज़बूत होती है। राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति, 1986 (1992 में यथासंशोधित) में भी यह परिकल्‍पना की गई है कि सीएबीई शैक्षिक विकास की समीक्षा करने में, प्रणाली को सुधारने में आवश्‍यक परिवर्तनों का निर्धारण करने में तथा कार्यान्‍वयन को मॉनीटर करने में केन्‍द्रीय भूमिका निभाएगा तथा मानव संसाधन विकास के विभिन्‍न क्षेत्रों के साथ सम्‍पर्क तथा उनमें समन्‍वय सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए उपयुक्‍त तंत्रों के ज़रिए कार्य करेगा। तदनुसार, सरकार ने जुलाई, 2004 मे सीएबीई को पुनर्गठित कर दिया है और पुनर्गठित सीएबीई की पहली बैठक 10 और 11 अगस्‍त, 2004 को हुई थी। इस बोर्ड में विभिन्‍न हितों का प्रतिनिधित्‍व करने वाले नामित सदस्‍यों के अलावा, लोक सभा और राज्‍य सभा के निर्वाचित सदस्‍य, भारत सरकार, राज्‍य सरकारों एवं संघ राज्‍य क्षेत्र प्रशासनों के प्रतिनिधि शामिल हैं।

शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी परियोजनाओं/कार्यक्रमों को कार्यान्वित करने के लिए भारत और विदेशों से प्राप्‍त छोटी धनराशियों सहित दानराशियां प्राप्‍त करना सुसाध्‍य बनाने के लिए, सरकार ने संस्‍था पंजीकरण अधिनियम, 1960 के तहत पंजीकृत संस्‍था के रूप में ‘’भारत शिक्षा कोष’’ स्‍थापित किया है। ‘’प्रवासी भारतीय दिवस’’ मनाने के दौरान, अधिकारिक तौर पर स्‍थापित किए गए इस कोष में व्‍यक्तियों, कारपोरेट, केन्‍द्र और राज्‍य सरकारों, अनिवासी भारतीयों और भारतीय मूल के व्‍यक्तियों से शिक्षा के सभी क्षेत्रों में विविध कार्यकलापों के लिए दान/अंशदान/धर्मदाय प्राप्‍त किए जाएंगे।


इस विषयवस्‍तु को निम्‍नलिखित श्रेणियों में आगे वर्गीकृत किया गया है :
 
(पृष्‍ठ 9 का पहला पृष्‍ठ )
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क्षेत्र> कृषि | वाणिज्‍य | संचार | रक्षा | शिक्षा | ग्रामीण विकास | जल संसाधन | उपभोक्‍ता कार्य | सार्वजनिक कार्यसड़क परिवहन
 
 
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निविदाएं

 
 
  महत्‍वपूर्ण लिंक्‍स
मानव संसाधन विकास मंत्रालय
प्रारंभिक शिक्षा और साक्षरता विभाग
माध्‍यमिक और उच्‍चतर शिक्षा विभाग
महिला और बाल विकास विभाग
दसवीं पंचवर्षीय योजना में प्रारंभिक शिक्षा का प्रावधान

दसवीं पंचवर्षीय योजना में माध्‍यमिक शिक्षा का प्रावधान

दसवीं पंचवर्षीय योजना में व्‍यवसायिक  शिक्षा का प्रावधान

दसवीं पंचवर्षीय योजना में तकनीकी शिक्षा का प्रावधान

दसवीं पंचवर्षीय योजना में वयस्‍क साक्षरता और शिक्षा जारी रखने का प्रावधान
दसवीं पंचवर्षीय योजना में शिक्षा के क्षेत्र में मध्‍यावधि मूल्‍य निरूपण प्रतिवेदन
मानव संसाधन विकास मंत्रालय का वार्षिक प्रतिवेदन
राष्‍ट्रीय साक्षरता अभियान-भारत
सर्व शिक्षा अभियान