ग्रामीण विकास मंत्रालय ग्रामीण भारत में तीव्र और स्थायी विकास तथा सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन लाने के काम में लगा है। पिछले कुछ वर्षों के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को सर्वाधिक प्राथमिकता दी गई है। नए कार्यक्रमों की शुरूआत करके, पुराने कार्यक्रमों को अधिक कारगर बनाने के लिए उनकी पुनर्सरंचना करके इस मंत्रालय द्वारा अनेक उपाय किए गए हैं और विकास प्रक्रिया में लोगों की भागीदारी को बढ़ावा दिया गया है।
ग्रामीण विकास मंत्रालय ग्रामीण भारत में तीव्र और स्थायी विकास को जनता की इच्छाओं और आकांक्षाओं के अनुरूप होने के लिए स्व-सहायता समूहों एवं पंचायती राज संस्थाओं के जरिए विकास प्रक्रिया में लोगों की भागीदारी के प्रति अधिक बल दिया जाने लगा है। ग्राम सभाओं को स्व-शासन का सक्रिय मंच बनाने के लिए इसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। देश के ग्रामीण इलाकों में बेरोजगारी की सबसे बड़ी चुनौती का सामना करने के लिए ग्रामीण निर्धनों के लिए दो मुख्य योजनाएं - मजदूरी रोजगार मुहैया कराने के लिए ''सम्पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना'' (एस जी आर वाई) तथा दूसरी स्व-रोजगार मुहैया कराने के लिए ''स्वर्णजयंती ग्राम स्वरोजगार योजना'' (एस जी एस वाई) कार्यान्वित की जा रही हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में अतिरिक्त अर्जन वाले रोजगार तथा खाद्य सुरक्षा के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ सामुदायिक, सामाजिक और आर्थिक मूल संरचना प्रदान करने के उद्देश्य सहित मौजूदा जवाहर ग्राम समृद्धि योजना और रोजगार आश्वासन योजना के विलय द्वारा सम्पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना को 25 सितम्बर 2001 को आरंभ किया गया। यह कार्यक्रम महिलाओं, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति और जोखिमपूर्ण व्यवसायों से निकाले गए अभिभावकों के बच्चों को पारिश्रमिक प्रदान करने पर विशेष बल सहित स्वलक्षित है।
विषय वस्तु को निम्नलिखित श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है :
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